उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के संभावित गठबंधन पर आज भी रहस्य बना हुआ है। दोनों दल राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन के हिस्से के रूप में एक-दूसरे के साथ दिखते हैं, लेकिन राज्य स्तर पर सीट बंटवारे और बराबरी की हिस्सेदारी को लेकर सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है।
2024 लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में 43 सीटें जीतकर भाजपा को 33 सीटों तक सीमित कर दिया था। इस सफलता के बाद दोनों दलों के बीच 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भी गठबंधन की चर्चाएं तेज रहीं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कई मौकों पर कह चुके हैं कि गठबंधन जारी रहेगा और फोकस सीटों पर नहीं बल्कि जीत पर रहेगा। वहीं कांग्रेस की तरफ से यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम समेत कई नेताओं ने बराबरी और सम्मान की मांग की है।
सीट बंटवारा सबसे बड़ा रोड़ा कांग्रेस नेता इमरान मसूद समेत कुछ नेताओं ने पहले 150 से ज्यादा सीटों का दावा किया था। कुछ रिपोर्टों में कांग्रेस की तरफ से 170-200 सीटों तक की बात कही गई। सपा खेमे से संकेत मिलते रहे हैं कि वे कांग्रेस को 40 से 80 सीटों से ज्यादा देने के पक्ष में नहीं हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में सपा ने 111 और कांग्रेस ने सिर्फ 2 सीटें जीती थीं। इसी वजह से सपा खुद को यूपी में बड़ा भाई मानती है।
आज की स्थिति आज भी दोनों दलों के बयान में साफ संकेत नहीं मिल रहे। अखिलेश यादव ने हाल में गठबंधन पर सवाल पूछे जाने पर गोलमोल जवाब दिया था कि “अभी चुनाव दूर है, लेकिन लोकसभा में हम एक साथ हैं।” कांग्रेस की तरफ से भी उच्च नेतृत्व पर फैसला छोड़ने की बात कही जा रही है। दिल्ली में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के साथ दिखने के बावजूद यूपी में गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों दल भाजपा के खिलाफ एकजुटता दिखाना चाहते हैं, लेकिन सीट बंटवारे में समझौता न होने से सस्पेंस बना हुआ है। कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा मायावती से संपर्क की खबरें भी गठबंधन की राह में बाधा बन सकती हैं।
राजनीतिक समीकरण अगर गठबंधन होता है तो यह भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। वहीं अगर बात नहीं बनी तो विपक्षी वोट बंट सकते हैं। ओवैसी की AIMIM भी सपा से गठबंधन का प्रस्ताव दे चुकी है, जिससे समीकरण और उलझ सकते हैं।
फिलहाल सपा-कांग्रेस गठबंधन 2027 के चुनाव को लेकर रहस्यमय बना हुआ है। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की बैठक और साफ बयान से ही इस सस्पेंस का पटाक्षेप हो सकता है। विधानसभा चुनाव अभी कुछ महीने दूर हैं, इसलिए राजनीतिक हलकों में इस गठबंधन की चर्चा जारी रहने की उम्मीद है।
